नेताजी सुभाष चन्द्र बोसः एक पराक्रमी योद्धा
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा दिया गया `जय हिन्द’ का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। `तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का उनका नारा भी उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया। आजादी की जंग में प्रमुख भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 23 जनवरी को 127 वीं जयंती मनाई जा रही है। उनकी जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका पूरा जीवन ही साहस व पराक्रम का उदाहरण है।
जम्मू-कश्मीर में रेल सेवा का विस्तार विकास के नये द्वार खोलेगा
भारत का मुकुट कहा जाने वाला जम्मू-कश्मीर महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश है। इसकी सीमाएं एक ओर पाकिस्तान के साथ लगी हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर भारतीय सीमा चीन के साथ लगी है। यह सारी सीमाएं अक्सर अशांत रहती हैं। एक ओर पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकवादियों की घुसपैठ करवाता है तो चीन भी सीमा को लेकर नए-नए विवाद पैदा करता रहा है।
हर 12 साल में ही क्यों लगता है कुम्भ मेला? क्या है इसका महत्व?
कुम्भ मेला लगने वाला है। यह हर 12 साल में चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज (इलाहाबाद), उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। कुंभ मेला इसलिए लगाया जाता है क्योंकि यह पौराणिक अमृत कलश की कथा, खगोलीय घटनाओं और कई अन्य धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। लेकिन कुम्भ मेला हर 12 साल पर ही क्यों लगता है, चलिए इसका कारण जानते हैं।
राशिफल : 13 जनवरी, 2025
मेष : अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। किसी से वाद-विवाद अथवा कहासुनी होने का भय रहेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। जल्दबाजी में कोई भूल संभव है। आय-व्यय की स्थिति समान्य रहेगी। शुभांक-5-7-8
वर्ष 2025 इतना महत्वपूर्ण क्यूँ ?
वर्ष 2025 में चार बड़े ग्रह जो वार्षिक राशिफल को दिखाते है। उन चारो ग्रह का राशी परिवर्तन होगा। इस बात का संकेत है की 2025 में बड़े परिवर्तन दिखेगा। कहीं अचछे तो कहीं बुरे प्रभाव दिखेंगे। 12 राशियों में इन परिवर्तन का अलग-अलग प्रभाव दिखेंगे। सबसे बड़े ग्रह शनि 29 मार्च 2025 को अपना राशी बदलकर मीन राशी में प्रवेश करेंगे।
क्या चीन में फैला है जानलेवा वायरस?
सारी दुनिया में चर्चा है कि चीन में एक बार फिर कोरोना वायरस अथवा उसके जैसा ही खतरनाक, जानलेवा वायरस फैला है। चीन खामोश है। क्या चीन इस बार भी संक्रमण के विस्फोट और विस्तार को छिपाए रखेगा? भारत सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से इन सवालों के स्पष्टीकरण मांगे हैं। क्या यह संगठन पुष्टि करेगा कि चीन में किस तरह का संक्रमण फैला है और वह भारत सरीखे पड़ोसी देशों के लिए कितना भयावह साबित हो सकता है?
कॉपी पेस्ट की जकड़न में आज की जेनरेशन
आज की जेनरेशन शार्टकट और कॉपी पेस्ट से आगे नहीं निकल पा रही है। इंटरनेट, मोबाइल, कम्प्यूटर और सोशियल मीडिया ने नई जेनरेशन को सीमित दायरे में कैद करके रख दिया है। नई पीढ़ी में से अधिकांश युवा कुछ नया करने, नया सोचने, नई दिशा खोजने के स्थान पर गूगल गुरु या इसी तरह के खोजी ऐप के सहारे आगे बढ़ने लगे हैं। तकनीक का विकास इस तरह से सोच और समझ को सीमित दायरे में लाने का काम करेगा, यह तो सोचा ही नहीं था। आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस तो इससे भी एक कदम आगे है। इसमें कोई दोराय नहीं कि तकनीक सहायक की भूमिका में हो तो वह आगे बढ़ने में सहायक हो सकती है पर तकनीक का जिस तरह से उपयोग होने लगा है वह ज्ञान और समझ को भोथरा करने में ही सहायक सिद्ध हो रहा है।
प्रयागराज के महाकुंभ नगर में सुविधाओं का संगम
प्रयागराज में 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा से महाकुंभ की शुरुआत हो रही है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का दूसरा स्नान है। इसे शाही स्नान और अमृत स्नान भी कहते हैं। संगम के मेला क्षेत्र में महाकुंभ नगर सज-धजकर तैयार है। दुनियाभर से पहुंचने वाले लाखों-करोड़ों तीर्थयात्रियों को संचार संपर्क में असुविधा न हो, इसके लिए केंद्रीय दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने व्यापक इंतजाम किए हैं।
महाकुंभः प्रयागराज बनाएं सबके बिगड़े काज
प्रयागराज में महाकुंभ मेले की शुरुआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन होगी। मान्यता है कि महाकुंभ के दौरान संगम स्नान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं के संकल्प पूरे होते हैं। महाकुंभ मेले का समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन होगा। प्रयागराज में हर 12 साल के अंतराल पर महाकुंभ का आयोजन होता है।
छत्तीसगढ़ : कोरिया जिले के तर्रा, बसेर और मेन्द्रा में 77 वर्ष बाद पहुंची बिजली
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सुदूर गांवों में बिजली पहुंचने की यह कहानी केवल तकनीकी विकास की नहीं है, बल्कि धैर्य, संघर्ष और आशा की जीत का प्रतीक है। यह एक ऐसा अवसर है जो इन गांवों के लोगों की जिंदगी में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है।