उस्ताद जाकिर हुसैन : थम गई तबले की थाप
संगीत संसार में तबले को एक नया आयाम देने और अपनी कला से भारत को विश्वपटल पर पहचान दिलाने वाले तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन अब इस संसार में नहीं रहें। उनकी अद्वितीय प्रतिभा और साधना ने तबले को एक नई पहचान दिलाई। जाकिर हुसैन ने तबला वादन की कला अपने पिता और गुरु उस्ताद अल्ला रक्खा से सीखी। अल्ला रक्खा स्वयं भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान तबला वादकों में से एक थे। जाकिर ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया। जाकिर हुसैन का संगीत तकनीकी दक्षता का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन था।
पूरा दिन बिजी रहने के चलते नहीं बिता पाते बच्चों संग समय तो ये उपाय आज़माएं और संजोएं यादों का पिटारा
आज की व्यस्त दिनचर्या में, माता-पिता अक्सर ऑफिस की ज़िम्मेदारियों के कारण बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाते। हालांकि, बच्चों के साथ हर दिन कुछ समय बिताना उनके भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, भले ही यह समय केवल एक घंटा ही क्यों न हो। इतना समय भी बच्चों के विकास
जलवायु परिवर्तन और भारत का दृष्टिकोण
जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत का सह-लाभ दृष्टिकोण विकास लक्ष्यों को पर्यावरणीय उद्देश्यों के साथ संरेखित करने का प्रयास करता है। साथ ही जलवायु चुनौतियों का समाधान करते हुए सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों को एकीकृत करके, इस रणनीति का उद्देश्य उत्सर्जन को कम करना और लचीलापन बढ़ाना है।
भारत का धर्म-दर्शन और विज्ञान का मधुफल
सम्पूर्ण प्रकृति से आत्मीय व्यवहार श्रेष्ठ है। प्रकृति की शक्तियां सुनिश्चित नियमों में गतिशील हैं। वैदिक पूर्वजों ने इस नियम को ऋत कहा है। प्रकृति की तरह मनुष्य को भी नियमों के अनुसार चलना चाहिए। प्रकृति और मनुष्य तथा मनुष्य और सभी मनुष्यों के मध्य आचार संहिता का नाम धर्म है। ईश्वर आस्था निजी विश्वास है।
ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता जरूरी
ऊर्जा मंत्रालय के अधीनस्थ ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा ऊर्जा दक्षता तथा संरक्षण में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए प्रतिवर्ष 14 दिसम्बर को ‘राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस’ का आयोजन विशेष थीम के साथ किया जाता है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस की इस वर्ष की थीम है ‘स्थायित्व को बढ़ावा देना: हर वाट मायने रखता है।’ ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा वर्ष 2001 में देश में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था।
भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता
कोठारी आयोग ने स्कूली शिक्षा में एकरूपता की नींव रखी और शैक्षिक सुधारों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। इसने 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की सिफ़ारिश की, जिसने भारत की शिक्षा प्रणाली में भविष्य के सुधारों के लिए मंच तैयार किया। इस नीति ने शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच पर ध्यान केंद्रित किया, जिसका उद्देश्य समानता में सुधार करना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना था।
एसएम कृष्णा का निधन: दिग्गज का राजनीतिक करियर, विरासत और ‘ब्रांड बेंगलुरु’
एसएम कृष्णा 45 से अधिक वर्षों तक कांग्रेस के साथ थे । 2017 में कांग्रेस छोड़ वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
वयोवृद्ध राजनेता सोमनाहल्ली मलैया कृष्ण, या एसएम कृष्णा, जिन्हें ‘ब्रांड बेंगलुरु’ को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के लिए जाना जाता है, का मंगलवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
कचरा प्रबंधन पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती
कचरा अब केवल शहरों की समस्या नहीं है। शहरीकरण और आधुनिकीकरण की होड़ में गांव-देहात भी कचरे की समस्या को झेलने को मजबूर हैं। पर्यावरण के नजरिये से घरों के निकलने वाले कूड़ों से अधिक प्लास्टिक कचरा, मेडिकल कचरा, इलेक्ट्रॉनिक कचरा इत्यादि ज्यादा नुकसानदेह हैं। एक अनुमान के मुताबिक देशभर से हर रोज निकलने वाले करीब तीन लाख मीट्रिक टन कूड़े में से तमाम नए तरह के कूड़े पैदा होने के चलते केवल एक चौथाई कूड़े का निबटान आसानी से हो पा रहा है।
बीमा सखी योजना: ग्रामीण महिलाओं को बनायेगी सशक्त
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक दिन पूर्व हरियाणा के पानीपत से महिलाओं के लिए ‘बीमा सखी’ योजना शुरू की। बीमा सखी योजना का उद्देश्य बीमा के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। यह महिला उद्यमिता को बढ़ावा देता है और पूरे भारत में आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाता है।
जीवेम शरद: शतम् !
आमतौर पर बुढ़ापा को अशक्तता, रोग, व्याधि और दुर्बलता आदि के कारण जीवन का सबसे भयावह दौर माना जाता है। परिवार की संरचना में बदलाव और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में बुढ़ापे की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। परंतु जीवन शैली में सुधार, दृष्टिकोण में सकारात्मकता, सावधानी बरतने और सहयोग लेने से इस दुखदायी अवधि को बहुत हद तक एक भाग्यशाली उम्र के रूप में बदला जा सकता है। जीवन के नियम आपके अपने हाथ में हैं इसलिए अच्छी तरह जिएँ और सब कुछ शांति से स्वीकार करें।