News Saga Desk
महाकुम्भ नगर : महात्मा दशरथ दास ने कहा कि वर्तमान में समाज में जितना भी दोष, दुर्गुण, बुराई, विकृति आदि व्याप्त है, उसका प्रमुख कारण है वर्तमान शिक्षा पद्धति। क्योंकि वर्तमान शिक्षा पद्धति को पूर्ण रूप से व्यावसायिक कर दिया गया है। प्राचीन भारतीय विद्या पद्धति अर्थात भारतीय गुरुकुल विद्या पद्धति को समाप्त कर दिया गया है। यह बातें उन्होंने सोमवार को संगम में सत्संग के दौरान कही।
उन्हाेंने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति का प्रमुख उद्वेश्य अधिकाधिक धन उपार्जन करना मात्र रह गया है, जिसके कारण शिक्षार्थी पथ भ्रष्ट हो रहे हैं। जबकि प्राचीन विद्या पद्धति का सूत्र था “सा विद्या या विमुक्तय” अर्थात विद्या वही है जो मुक्ति देने वाली हो। अब शिक्षार्थियों को केवल संसार और शरीर की जानकारी देकर जड़ी एवं मूढ़ी बनाया जा रहा है
जबकि प्राचीन विद्या पद्धति में योग, अध्यात्म, स्वाध्याय के माध्यम से जीव एवं चेतन सत्ता शक्ति आत्मा ईश्वर ब्रह्म की जानकारी व दर्शन कराते हुए त्याग, वैराग्य से युक्त महापुरुष बनाया जाता था। स्वाध्याय के बिना कोई भी मनुष्य, मनुष्य नहीं कहला सकता। अगर आज अमन चैन युक्त खुशहाल समाज का निर्माण करना है
तो विद्यालयों में प्राचीन भारतीय विद्या पद्धति को लागू करना ही होगा। महात्मा दास ने कहा कि आज भी सदानन्द तत्त्वज्ञान परिषद् के अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को विद्यातत्त्वम पद्धति पढ़ाया जाता है। उन्होंने सरकार से निवेदन किया कि देश व समाज के स्कूल कॉलेजों में सत्य की पढ़ाई अर्थात प्राचीन विद्यातत्त्वम पद्धति को पढ़ाया जाए।
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