News saga Desk
रांची। हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) को अपने संसाधनों से चलाने की योजना फिर से बनाई जा रही है। HEC की यूनियनों ने प्रबंधन पर दबाव डालना शुरू कर दिया है कि खाली जमीन, भवन और क्वार्टर को लीज या बिक्री के जरिए मिलने वाली राशि से कंपनी को संचालित किया जाए।
संसाधनों के उपयोग का रास्ता साफ
भारी उद्योग मंत्री ने हाल ही में स्पष्ट किया कि HEC को अपनी सभी देनदारियों का भुगतान अपने संसाधनों से ही करना होगा। इसके बाद यूनियनों ने प्रबंधन से मांग की है कि वह जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार करे। श्रमिक नेताओं का कहना है कि HEC के पास बड़ी मात्रा में जमीन, भवन और क्वार्टर हैं, जिन्हें लीज पर देकर कंपनी की वित्तीय स्थिति को सुधारा जा सकता है।
पहले केंद्र सरकार ने रोका था प्रस्ताव
पहले भी एचईसी ने अपने संसाधनों का उपयोग करने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन उस समय यह प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था। एनटीपीसी, बैंक और तेल कंपनियों ने एचईसी की जमीन लीज पर लेने की इच्छा जताई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया।
नीति आयोग ने भी जमीन को संसाधन माना था
तत्कालीन नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके सारस्वत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने एचईसी के आधुनिकीकरण के लिए 1100 करोड़ रुपये की योजना तैयार की थी। इसमें तीन चरणों में आधुनिकीकरण की
सिफारिश की गई थी
पहला चरण: 500 करोड़ रुपये
दूसरा और तीसरा चरण: 300-300 करोड़ रुपये
इसके अलावा, स्मार्ट सिटी योजना से मिलने वाले 742 करोड़ रुपये को भी आधुनिकीकरण में लगाने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया है। अब जब सरकार ने एचईसी को अपने संसाधनों का इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है, तो प्रबंधन को जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार कर इसे अमल में लाने की जरूरत है।
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